Friday, April 14, 2017

पीलिया (jaundice) और lever संबंधी रोग

पीलिया के कारण

जॉण्डिस या पीलिया अनेक कारणों से होता है। शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन प्रोटीन होता है जो कि रक्त में ऑक्सीजन वाहक का कार्य करता है। रक्त की लाल रक्त कोशिकाएं निरंतर बनती रहती हैं और पुरानी नष्ट होती रहती हैं। लाल रक्त कोशिकाओं से टूटने से हीमोग्लोबिन निकलकर बिलिरूबिन लवण में परिवर्तित हो जाता है, वहां से बिलिरूविन लिवर में पहुंचकर रासायनिक परिवर्तन मल या पेशाब के माध्यम से शरीर से निकलता रहता है। यदि लाल रक्तकोशिकाओं की टूटने की प्रक्रिया तेजी से होती रहती है या लीवर के रोगों में बिलिरूबिन का स्तर रक्त में बढ़ जाता है, रक्त में जब बिलिरूबिन का स्तर 0.8 मि.ग्रा. प्रति 100 मि.ली. से बढ़ जाता है तो यह दशा जॉण्डिस कहलाती है, पर आंखा तथा त्वचा का पीला रंग रक्त में बिलिरूबिन की मात्रा 2 से 2.5मि.ग्रा. तक बढ़ने पर ही दिखाई पड़ता है।


लाल रक्त कणिकाओं के तेजी से टूटने के परिणामस्वरूप होने वाले पीलिया को ‘हिमोलिटिक जॉण्डिस’ कहते हैं। यह दशा असामान्य लाल रक्त किणकाएं या हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण कुछ विष या दवाओं के प्रभाव से हो सकती है। इस रोग में मूत्र का रंग सामान्य और मल गहरा भूरे रंग का होता है। जांच करने पर लीवर की कार्यशक्ति सामान्य मिलती है। दूसरी तरह का पीलिया लीवर रोगों जैसे वायरल हिपेटाइटिस,सिरहोसिस इत्यादि में लीवर में बिलिरूबिन का युग्गम बाधित हो जाने के फलस्वरूप होता है, इस दशा को ‘हिपेटिक जॉण्डिस’ कहा जाता है। इन रोगों में पेशाब का रंग गहरा पीला, मल चिकना और हल्के रंग का होता है। जांच करने के लिए लीवर की कार्यक्षमता कम मिलती। तीसरी दशा में पित्त के निकास मार्ग में पत्थरी या कैंसर या संक्रमण के कारण,बाधा आने के कारण होने वाले पीलिया रोग को ‘आबस्ट्रक्टिव जॉण्डिस’ कहते हैं। इस दशा में मूत्र का रंग गहरा पीला, मलचिकना और सफेद या मिट्टी के रंग का होता है तथा लीवर की कार्यक्षमता शुरूआत में सामान्य होती है।


नवजात शिशु में पीलिया- नवजात शिशुओं में कभी-कभी खास तौर पर यदि जन्म से पहले अपरिपक्व जन्में हैं तो जन्म के बाद 2-3 बार हल्का पीलिया हो जाता है। वैज्ञानिकों के विचार में इस प्रकार के पीलिया का कारण लीवर का अपरिपक्व होना होता है। इन शिशुओं का उपचारअल्ट्रावायलेट किरणों में कुछ समय तक रखकर किया जाता है।


एक अन्य प्रकार का गंभीर जॉण्डिस बच्चों में मां और गर्भस्थ बच्चें में आर.एच. ब्लड ग्रुप के अलग-अलग होने के परिणामस्वरूप हो सकता है। यदि मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता एवं गर्भस्थ शिशु का पॉजिटिव है तो शिशु की लाल रक्त कणिकाएं टूटने लगती हैं ऐसी दशा में बच्चा पीलिया ग्रसित जन्म ले सकता है, यदि रक्त में बिलिरूबिन का स्तर 20मि.ग्रा. से ज्यादा है तो मस्तिष्क पर स्थायी प्रभाव हो सकता है। इस रोग की रोकथाम के लिए मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता का पॉजिटिव है तो मां को गर्भावस्था की तीसरे तिमाही में तथा प्रसव के बाद एन्टीबाडीज के इन्जेक्शन दिए जाते हैं जिससे एन्टीजन नष्ट हो जाएं और गर्भस्थ शिशु तथा अगले बच्चे में समस्या न हो। यदि कोई शिशु रोगग्रसित जन्म लेता है तो उस नवजात शिशु का रक्त स्वच्छ बच्चे के ही रक्तगु्रप के रक्त से बदलकर उपचार किया जाता है। अनेक बच्चों में गुण सूत्रों में बदलाव के कारण लाल रक्त कणिकाओं में टूटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।


वायरस हिपेटाइटिस-इस पीलिया के होने का सबसे सामान्य कारण लीवर का वायरस से संक्रमण है, लीवर को हिपेटाइटिस ए. बी. सी. डी. ई. प्रजाति के वायरस संक्रमित कर सकते हैं। ए और ई प्रजाति के वायरस से संक्रमण पीलिया होने का सबसे प्रमुख कारण है। हिपेटाइटिस बी, सी, डी, प्रजाति के वायरस से संक्रमण एड्स रोग के सदृश्य संक्रमित सूई से इन्जेक्शन लगने, संक्रमित मरीज के रक्त चढ़ाए जाने, संभोग से या गर्भस्थ शिशु को संक्रमित मां से फैल सकता है

पीलिया का सरल और अनुभूत उपचार

पीलिया का सरल और अनुभूत उपचार

गन्ने का रस पीलिया रोग में बड़ा लाभ-प्रद है यह पीलिया की जड़ काट देता है ।

एक नग खाने का बंगला पान (खाने में चरपरा, तीखा लगता है) लेकर इस पान को चूना और कत्था लगाएं । अब इस पान में अंक (अकौंना, मदार जामुनी फूल वाला) का दूध 3-4 बूँद डालकर प्रात: खा लें | इससे पीलिया शर्तिया ठीक हो सकता है । यदि आंख की सफेद पुतली, ऊपरी आधी-चौड़ाई सतह ही पीली हुई हो तो 3 दिन यह पान खाने पर पीलिया एकदम ठीक हो जाता है । पूरी सफेद पुतली होने पर ठीक होने के लिये 5दिन लग जाते है ।

आक पत्ते का दूध प्राप्त करने की विधि - 1. सूर्योदय से पूर्व आक का पत्ता तोड़ कर दूध निकाल लेना चाहिये । 2. आक का दूध चिकना होता है । और आंखों के लिये अत्यंत हानिकारक होता है ।


सावधानी - अत: पत्ते से दूध निकालते समय हाथ किसी प्रकार से आंखों में नहीं लगना चाहिये अन्यथा आंख पर गलती से भी आक का दूध लग जाने से आंख खराब हो सकती है । बच्चों से कभी आक का पत्ता, फूल तोड़ने को नहीं कहना चाहिये । 3.आक के पत्ते के पीछे सफेद रेशे रहते है । इन्हें पोंछकर साफ कर लेना चाहिये न पोंछने पर उल्टी हो सकती है । बरसात एवं बादल के समय पत्तों पर पीछे पीले-लाल रंग के कीड़े रहते हैं उन्हें हटा देना चाहिए ।

 गन्ने का रस पीलिया रोग में बड़ा लाभ-प्रद है यह पीलिया की जड़ काट देता है ।

पीलिया (jaundice) और lever संबंधी रोग !

सामान्यत; शरीर में बिलुरुबिन की मात्रा 1.0  होनी चाहिए । लेकिन यह 2.5 या इससे अधिक हो जाए तो पीलिया रोग हो सकता है ।  यह लीवर के ठीक तरह से काम न करने पर हो सकता है । इसके अतिरिक्त जलोदर (ascites ) , तिल्ली (spleen ) बढ़ना आदि बीमारियों के लिए कई  बूटियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं :

मेंहदी ; इसकी 3-5 ग्राम पत्तियों को रात को कूटकर 300-400 ग्राम पानी में मिटटी के बर्तन में भिगो दें । इस पानी को छानकर सवेरे खाली पेट पी लें । इससे पाचन क्रिया को बल मिलेगा , लीवर सम्बन्धी सब समस्याएँ भी दूर हो जाएँगी ।

ममीरा : इसका काढ़ा सवेरे शाम पीने से बढ़ा हुआ बिलुरुबिन ठीक हो जाता है ।

मूली ; इसकी सब्ज़ी खाते रहें तो पेट ठीक रहता है । इसके पत्तों की सब्ज़ी भी लाभकारी होती है ।
पीलिया रोग होने पर मूली का रस एक कप सवेरे खाली पेट पीने से लाभ होता है ।
spleen बढ़ जाए या जलोदर के रोग से पेट फूल जाए ; तो मूली बहुत लाभदायक रहती है । जितनी मूली खाई जा सके; उतनी लें । उसके चार टुकड़े करके प्लेट में रखें । उस पर केवल 3-4 ग्राम नौशादर बुरक दें । इसे रात को खुले में रख दें । सवेरे मूली कुछ पानी छोड़ देगी । पहले पानी पीएँ , फिर मूली चबा चबा कर खा लें । यह प्रयोग खाली पेट करना है । इससे शत प्रतिशत आराम आता है ।

पुनर्नवा ; पुनर्नवा शरीर को पुन: नया कर देती है । अगर बिलुरुबिन down नहीं जा रहा तो इसकी जड़ का रस पिला दें । या इसकी सूखी जड़ मिले तो उसका काढ़ा पिला दें । पीरे सूखे हुए पौधे को पंचांग कहते हैं । इसके पंचांग को 5-7 ग्राम की मात्रा में लेकर उसे पानी में उबालकर , काढ़कर , काढ़ा सवेरे शाम पीने से पीलिया रोग में आराम आता है । इसकी जड़ के टुकड़ों की माला गले में पहनने से भी आराम आता है ।

शिरीष ; जलोदर(ascites) रोग में , पेट में पानी भर जाता है । इस रोग में इसकी छाल को 10 ग्राम की मात्रा में लें । उसे 300-400 ग्राम पानी में पका कर , काढ़कर इसका काढ़ा सवेरे शाम पीयें । इससे शरीर के विजातीय तत्व बाहर निकल जाएंगे और जलोदर रोग में आराम आएगा । यह प्रयोग निरापद है ।

सफ़ेद प्याज ; इसके 3-4 चम्मच रस रोज़ पीने से पीलिया ठीक होता है । प्याज़ को काटकर , उसमे काला नमक लगाकर , नीम्बू का रस निचोड़ लें । इस तरह से रोज़ प्याज़ खाने से बढा हुआ लीवर ठीक होता है । बढ़ी हुई spleen में भी इस तरह प्याज़ खाने से आराम आता है ।

अरण्ड ;  पीलिया में दिन में तीन बार तीन से पांच दिन तक अरंड के पत्तों का दो चम्मच रस लें . रस लेने के एक घंटे बाद कुछ हल्का खाएं ; जैसे मक्की या चने की रोटी छाछ आदि ।   ascities  (जलोदर) की बीमारी में   पेट   फूल जाता है ।  इसमें अरंड के पंचांग (पाँचों अंग ) बीस ग्राम लेकर पचास ग्राम गोमूत्र में पकाएं . जब आधा रह जाए छानकर सवेरे खाली पेट पिएँ । 

आक ;    अगर आक की एक बिलकुल छोटी सी कोंपल को पान के पत्ते में रखकर तीन दिन खाया जाए तो इससे पीलिया ठीक होता है । 

श्योनाक (सोना पाठा, टोटला) ;    श्योनाक की लकड़ी  के गिलास में रात को 200 ml पानी रखें . सवेरे सवेरे पी लें . Lever संबंधी सभी बीमारियाँ ठीक हो जायेंगी और कभी होंगी भी नहीं। 

मुलेठी (licorice roots) ;  पीलिया होने पर , मुलेठी और पुनर्नवा की जड़ को मिलकर , काढ़ा बनाकर पीएँ । 

गाजर   ;  गाजर का रस पीते रहने से पीलिया जल्दी ठीक होता है । 

गन्ना ;       पीलिया रोग में इसका रस लिया जाए तो पीलिया जल्द ठीक होता है । इसके रस में धनिया और अदरक भी मिला लें तो और भी अच्छा रहेगा । इसका छिलका उतारकर , रात को ओस में रखकर अगर सवेरे इसे चूसा जाए तो लाभ और भी अधिक होता है । गन्ने के रस में अनार का रस मिलाकर लिया जाए तो पीलिया भी जल्द ठीक होता है और शरीर में खून की भी कमी भी नहीं होती ।     

अमरुद ;   लीवर damage हो गया हो या भूख कम लगती हो ; तब अमरुद को टुकड़े करके, नमक लगाकर, आग में भूनकर, खाना चाहिए । खाना खाने से कुछ देर पहले इस फल को खाया जाए तो यह आँतों और liver के लिए बहुत अच्छा रहता है । 

भुइं आंवला  ;    Liver या यकृत की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है ।  लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा ।  Bilurubin बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पढ़े को जड़ों समेत उखाडकर , उसका काढ़ा सुबह शाम लें ।  सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ bilurubin ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी । 
      अगर वर्ष में एक महीने भी  इसका काढ़ा ले लिया जाए तो पूरे वर्ष लीवर की कोई समस्या ही नहीं होगी । 
                    Hepatitis -B और C के लिए यह रामबाण है ।  भुई आंवला +श्योनाक +पुनर्नवा ; इन तीनो को मिलाकर इनका रस लें । ताज़ा न मिले तो इनके पंचांग का काढ़ा लेते रहने से यह बीमारी  बिलकुल ठीक हो जाती है । 

दारुहल्दी (berberry)  ;    पीलिया की बीमारी में अक्सर पीली वस्तु नहीं देते , परन्तु इसका काढ़ा पीलिया को ठीक करता है । लीवर पर भी इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता । 

रेवनचीनी  ;   लीवर में सूजन हो तब भी इसका पावडर लेते रहने से वह ठीक हो जाता है ।  

अमलतास (purging cassia) ;  10 ग्राम अमलतास  का गूदा +2 ग्राम बहेड़ा + 2 ग्राम नागरमोथा +1 ग्राम कुटकी ; ये सभी मिलाकर , 400 ग्राम पानी में पकाएं   जब रह जाए 100 ग्राम , तो छानकर पीयें  यह सवेरे शाम लेने से  लीवर ठीक रहता है   सारा body system भी ठीक हो जाता है   इससे बेचैनी भी दूर होती है।   

शिरीष  ;    पेट फूल जाए या लीवर का  infection हो तो इसी छाल का पावडर या काढ़ा लें।   

बबूल या कीकर ;    lever की समस्या है तो इसकी फलियों का पावडर +मुलेठी +आंवला मिलाकर , काढ़ा बनाकर पीयें । 

द्रोणपुष्पी ( गुम्मा ) ;   लीवर ठीक न हो ,SGOT , SGPT आदि बाधा हुआ हो तो इसके काढ़े में मुनक्का डालकर मसलकर छानकर पीयें ।

 ममीरा ( gold thread cypress)  ;    Lever की समस्या में सुबह शाम इसकी जड़ का काढ़ा लें | 

निर्गुण्डी (vitex negundo)  ;  जलोदर या ascites होने पर नाभि के आसपास इसका रस मलें . वातज रोग हों , arthritis हो और सूजन आई हुई हो तो इसके पत्ते उबालकर सिकाई करें . बहुत जल्द आराम आएगा . सूजन होने पर इसके पत्ते उबालकर पीयें और इसके पत्तों को कूटकर , सरसों के तेल में गर्म करके पेस्ट बनाएं और उसे रुई में रखकर घुटनों पर बांधें |  

 धातकी ( woodfordia) ;   lever या spleen के लिए फूल और पत्तियों को काढ़ा बनाकर ले लें ।  थोडा कुटकी का पावडर भी थोडा मिला लें ।  मिश्री या शहद भी मिला सकते हैं | Ascites या जलोदर होने पर इसके फूल व् पत्तियों का काढ़ा लें , या केवल फूलों का शर्बत लें ।  इसके सूखे फूलों का पावडर भी लिया जा सकता है ।  यह पौष्टिक तो होता ही है । 

मुलेठी (licorice root) ;  पीलिया होने पर , मुलेठी और पुनर्नवा मूल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीयें ।  

पिप्पली (long pepper)  ;  लीवर बढ़ा हुआ है तो  5 gram पिप्पली +एक ग्राम पीपलामूल मिलाकर लें |  यह दर्द के लिए भी अच्छा है ।   

भृंगराज   ;    पीलिया होने पर इसके पत्तों का 10 ग्राम रस दिन में 2-3 बार लें ।  3-4 दिन में ही आराम आ जाता है ।  

शरपुंखा   ;      इसे प्लीहा शत्रु भी कहते है क्योंकि  यह spleen को ठीक करती है ।  इसके पंचांग को मोटा मोटा कूटकर 5-10 ग्राम लें और 200 ग्राम पानी में काढ़ा बनाकर पीयें।  इस काढ़े से जिगर या लीवर भी ठीक होता है ।  यह काढ़ा खून की कमी को भी दूर करता है । 

मकोय (black nightshade)  ;   लीवर ठीक नहीं है ,  पेट खराब है , आँतों में infection है ,  spleen बढ़ी हुई है या फिर पेट में पानी भर गया है ;  सभी का इलाज है मकोय की सब्जी । रोज़ इसकी सब्जी खाएं । या फिर इसके 10 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीयें ।
                  पीलिया होने पर  इसके पत्तों का रस 2-4 चम्मच पानी मिलाकर ले लें ।  

बाकुची (psoralea seeds) ;  पीलिया होने पर 10 mg पुनर्नवा की जड़ का रस लेकर उसमें 250 mg बाकुची के बीजों का पावडर मिलाकर लें ।  

बथुआ (chenopodium) ;  अगर लीवर की समस्या है तो , पूरे पौधे को सुखाकर 10 ग्राम पंचांग का काढ़ा पिलायें ।   कहीं पर सूजन हो लीवर की समस्या हो तो इसका साग बहुत लाभकारी है ।  पीलिया होने पर बथुआ +गिलोय का रस 25-30 ml तक ले सकते हैं । 


सफ़ेद प्याज (white onion) ;  Ascites या जलोदर की बीमारी है तो , प्याज भूनकर खानी चाहिए ।  पीलिया होने पर 3-4 चम्मच प्याज का रस लें . लीवर या spleen की समस्या हो तो प्याज में काला नमक और नीम्बू मिलाकर लें ।  

नागफनी (prickly pear) ; लीवर , spleen बढ़ने पर , कम भूख लगने पर या ascites होने पर इसके 4-5 ग्राम रस में,  10 ग्राम गोमूत्र , सौंठ और काली मिर्च मिलाएं ।  इसे नियमित रूप से लेते रहने से ये सभी बीमारियाँ ठीक होती हैं ।  

घृतकुमारी (aloe vera)  ;  अगर पाचन ठीक तरह से नहीं हो रहा या लीवर खराब है तो इसे सब्जी या लड्डू बनाकर खाएं ; या फिर इसका गूदा खाली पेट खा लें ।  E S R ज्यादा है तब भी यह बहुत मददगार है ।  इसके एक लिटर गूदे में पचास ग्राम काला नमक डालें और दस ग्राम काली मिर्च !   फिर 60 ml निम्बू का रस मिलाकर कांच के  मर्तबान में रखकर दस-पन्द्रह दिन धूप में रखें ।  यह स्वादिष्ट गूदा एक चम्मच सवेरे शाम लेते रहने से liver ठीक रहता है ।  

आँवला   ;  पीलिया हो तब आंवले का रस बहुत लाभदायक है । 

करेला (bitter gourd)  ;   अगर  सोंठ, पीपल,और  काली मिर्च को करेले के जूसके साथ मिलकर लिया जाए तो लीवर ठीक होता है ।  पीलिया भी ठीक होता है । 

घृतकुमारी (aloe vera )  ;   किसी प्रकार की लीवर की समस्या हो तो aloe vera  का प्रयोग करें । 

कंटकारी , कटैली (yellow berried nightshade)  ;   सूखे पौधे को पांच ग्राम लें और चार सौ ग्राम पानी में उबालें ।  जब एक चौथाई रह जाए तो खाली पेट पी लें ।  लीवर में सूजन होने पर यह काढ़ा सवेरे शाम लें । 

अंजीर (fig )  ;   लीवर ठीक नहीं है तो अंजीर रात को भिगोकर सुबह चबा चबा कर खाएं और जिस पानी में भिगोया है ; वह भी पी लें ।  अगर पीलिया हो गया है तो सर्वक्ल्प क्वाथ में अंजीर डालकर काढ़ा बनाएं ।  पीलिया बहुत जल्द ठीक होगा । 

गिलोय  ;  अगर पीलिया है तो इसकी डंडी के साथ  ;  पुनर्नवा  (साठी;  जिसका गाँवों में साग भी खाते हैं)  की जड़ भी कूटकर काढ़ा बनायें और पीयें । liver की बीमारी में भी इसे लेने से लाभ होता है ।  

सहदेवी  ;  यह बड़ी कोमल प्रकृति का होता है ।  इसका 1-3 ग्राम पंचांग और 3-7 काली मिर्च मिलाकर काढ़ा बना कर सवेरे शाम लें । यह लीवर के लिए बहुत अच्छा है । 

अपराजिता ;  इसके जड़ के टुकड़े लाल धागे में माला की तरह पहनें ; इसकी जड़ का काढ़ा पीयें।  पीलिया होने पर ऐसा करने से यह बीमारी ठीक होती है । 

श्योनाक, टोटला ;   इसकी लकड़ी का खोखला गिलास जैसा बर्तन लें।  रात को इसमें 200-300 ml पानी भर दें।  इसे सवेरे सवेरे पीयें ।  इससे लीवर ठीक होता है ।  S.G.O.T. और S.G. P. T. आदि normal हो जाते हैं ।  पहाड़ों में तो इस पानी से मलेरिया तक ठीक किया जाता है। 

पीलिया हो तो इसकी ताज़ी छाल लेकर (बच्चा है तो 4-5 ग्राम बड़ा है तो 10-12 ग्राम )  कूटकर मिटटी के बर्तन में रात को 200 ml पानी में भिगो दें।  सवेरे मूंग जितना खाने वाला कपूर खिलाकर ये पानी पिला दें।  यह प्रयोग तीन दिन करें। ध्यान रहे श्योनाक अधिक मात्रा में ली तो खुजली हो सकती है और कपूर अधिक मात्रा में लिया तो चक्कर आ सकते हैं। 

Hepatitis-B या C होने पर श्योनाक +भूमि आंवला +पुनर्नवा (साठी) का रस लेते रहें। ये बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। 

कचनार  ;   इसकी पत्तियों का रस 100 ग्राम सवेरे शाम लें तो लीवर ठीक रहता है और पीलिया भी ठीक हो जाता है।