Saturday, April 29, 2017

उतारें आँखों का चश्मा, नेत्र से जुड़े सभी रोगों में रामबाण है ये सरल अचूक नुस्खा

उतारें आँखों का चश्मा, नेत्र से जुड़े सभी रोगों में रामबाण है ये सरल अचूक नुस्खा

आंख हमारे शरीर का सबसे अधिक आकर्षण वाला हिस्सा ही नहीं, बल्कि सबसे उपयोगी अंग भी है। इसका सिर्फ खूबसूरत होना तबतक मायने नहीं रखता जबतक कि आपके आंखों की रोशनी भी सलामत न हो, क्योंकि ऐसा नहीं हुआ तो या तो आपकी खूबसूरत आंखों को चश्मे के मोटे-मोटे फ्रेम की नज़र लग जाएगी या फिर लेंस लगाने के झंझटों में फंसे ही रहेंगे।
आँखों के रोग के कारण
आंखों की रोशनी कम होने की वजह है भोजन में विटामिन एकी कमी, जिस वजह से छोटी उम्र से ही आंखें कमजोर होने लगती है।
दूसरी वजह घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करना या टेलीविजन देखना।
तीसरी वजह आंखों की सफाई पर ध्यान न देना।
ये कुछ वजह हैं जो आंखों की रोशनी को कम करती हैं और आपको चश्मा लगाने के लिए विवश करती है कुछ और वजह भी है जैसे की आधुनिक दौर में आनुवंशिकता, काम का दबाव, तनाव, पोषण की कमी, अधिक पढाई जैसे कारकों के कारण लोगों के चश्मे के नंबर बढ़ते जा रहे हैं। आँखों को धूल और इन्फेक्शन से बचाने के अलावा यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताये जा रहे हैं जो आपकी आँखों की दृष्टि बढ़ा सकते हैं। घरेलू उपचार द्वारा आँखों की रोशनी किस तरह बढ़ाई जा सकती है आइये जानते हैं।

आँखों के रोगों का आयुर्वेदिक इलाज

यदि आपकी आँखों में जलन होती है, धुंधलापन है तो इसके लिए आंवला व धनिये का पाउडर बहुत ही लाभकारी है ! इसके लिए आंवले के 2 – 3 टुकड़े व धनिये के रस में भिगोकर सुबह – सुबह उसके पानी से आँखों को धोएं ! इससे आँखों का धुंधलापन दूर होगा और जलन में भी लाभ होगा !नाभि में रोजाना सरसों का तेल लगाने से आँखों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है !मुलेठी को दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखे ! उसके बाद उस पानी में रुई डुबोकर पलकों पर रखें, ऐसा करने से आँखों की जलन व दर्द में आराम मिलता है !प्रात: काल उठते ही अपना बासी थूक संक्रमित आँखों पर लगाने से लाभ होगा !
काली मिर्च का चूर्ण, घी और मिश्री मिलाकर रोज सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
प्रतिदिन पपीता खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
हरे धनिया को पीसकर उसका रस निकाल लें और उसे साफ कपड़े में छान लें और इसकी 2-2 बूंदें आंखों में डालने से दुखती आंखे ठीक होती हैं।
सेब का मुरब्बा खायें और उसके बाद दूध का सेवन करें एैसा करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
सुबह उठकर मुंह में ठंडा पानी भरकर मुंह को फुलायें और ठंडे पानी से आखों में छीटें मारें।
प्रतिदिन फल और सब्जियों का सेवन करने से आंखों की शक्ति बढ़ती है।
सुबह जल्दी उठकर पार्क में ओस पड़ी घास में नंगे पैरों से चलने से कमजोर आंखें तेज होती है।
प्रतिदिन यदि आप गाजर का जूस पिएं तो आंखों की रोशनी बढ़ेगी।
प्रतिदिन नहाने से पहले पांवों के अंगूठे में तेल मलकर नहाने से आंखों की रोशनी प्रबल होती है।
सेब के सेवन करने और उसका जूस पीने से आंखों की ज्याति तेज होती है।

नेत्र रोग घरेलू उपचार – दृष्टि के लिए आँखों के कुछ व्यायाम

आई रोलिंग
अपनी आँखों को घड़ी की सुई की दिशा में 10 बार घुमाएँ और 2 मिनिट के आराम के बाद उल्टी दिशा में 10 बार घुमायें। यह आँखों को स्वस्थ रखता है।
पेंसिल पुश-अप्स
आँखों की रोशनी बढाने का तरीका एक पेंसिल लें और उसके मध्य में कोई अक्षर लिखें या निशान लगायें अब इसे आँखों से सामने बाँहों की दूरी पर पकड़ें और उस निशान पर फोकस करें अब धीरे धीरे इसे नाक की ओर लायें और फोकस बनाये रखें। इसे तब तक करीब लायें जब तक यह दो भागों में न दिखाई देने लगे, और जैसे ही यह दो भागों में बंटे इसे हटा लें और थोड़ी देर आँखों को खुला छोड़ कर इधर उधर देखें। थोड़ी देर बाद पुनः इसे 4 से 5 बार दोहरायें। यह आँखों की रोशनी बढाने का सर्वोत्तम व्यायाम है।

कनपटी की मालिश
आँखो की कमजोरी, अपनी कनपटी के दोनों ओर एक साथ अंगूठों से घड़ी की दिशा मे और घड़ी की विपरीत दिशा मे 20 बार मालिश करें और इसी प्रकार नाक के जोड़ और माथे के बीच में भी मालिश करें।

नेत्र रोग हो तो :सरल उपचार और मंत्र 

किसीको नेत्र रोग है, आँखों की तकलीफ़ है, आँखों की रोशनी कमजोर है तो वे भगवान का.... अपने आराध्य का..... अपने सदगुरु को स्मरण करके ॐ पुष्कराक्षाय नम: जप करे और वे लोग प्राण मुद्रा का भी अभ्यास करे |

लोकोक्तियों में नेत्र-रोग निवारण

किसीको नेत्र रोग है, आँखों की तकलीफ़ है, आँखों की रोशनी कमजोर है तो वे भगवान का.... अपने आराध्य का..... अपने सदगुरु को स्मरण करके ॐ पुष्कराक्षाय नम: जप करे और वे लोग प्राण मुद्रा का भी अभ्यास करे |

लोकोक्तियों में नेत्र-रोग निवारण

1. काली मिर्च को पीसकर,घी बूरा संग खाय     नेत्ररोग सब दूर हों,गिद्ध-दृष्टि हो जाए

2. मिट्टी के नव-पात्र में,त्रिफला रात्रि में डाल     रोज़ सवेरे धोय के,नेत्ररोग को टाल

3. ताम्र के एक पात्र में, घमिरा रस को निचोय     रूई साफ भिगोय के,लीजे छांह सुखाय

4. सरसों तेल मिलाय के,आग में देहु जलाय     ढकिए थाली फूल की,काजल लेहु बनाय

5. कालिख सरसों तेल में,घिसै उंगली डार     ऐसे सरल उपाय सो,काजल करो तैयार

6. रतौंधी धुंधी खुजली या नेत्र लाल पड़ जाए     बढ़े रोशनी आंख की,सारे रोग नसाय

7. आंख-कान के मध्य में चूना लेप लगाय     आई आंख अच्छी करे और ललाई जाय

8. भुनी फिटकरी लीजिए,जल गुलाब में घोल     आंखों की जलन मिटे,ये वैद्य के बोल

9. केशर शहद मिलाय के,नेत्रन माहि लगाय     लाली और गरमी मिटै,रोग रतौंधी जाय

10. बरगद के दूध में घिस,कपूर लगाओ नैन       फूली मिटे छोटी-बड़ी,और पाओ सुख चैन

11. शुद्ध शहद में लीजिए,सेंधा नमक मिलाय       थोड़े दिन ही लगाइए,फूली देत मिटाय

रोजाना एक चम्मच शुद्ध शहद खाने से भी आंखों की रोशनी दुरूस्त रहती है 
यूं तो शरीर का हर एक अंग महत्वपूर्ण होता है लेकिन आंखों के बिना जीवन अधूरा लगता है। आयुर्वेद के ग्रंथों में नेत्र रक्षा के विभिन्न उपायों का वर्णन किया गया है। आइए जानते हैं उनके बारे में-

1. हरीतकी, बहेड़ा और आंवला का नियमित प्रयोग नेत्र ज्योति को बढ़ाता है। इन तीनों चूर्ण के मिश्रण की 3-6 ग्राम मात्रा रोजाना ली जा सकती है। 
2. त्रिफला के क्वाथ से रोजाना आंखों को धोने से नेत्र रोग दूर होते हंै। त्रिफला क्वाथ को शहद या घी के साथ लेने से भी नेत्र रोगों में लाभ होता है। त्रिफला चूर्ण को एक भाग घी व तीन भाग शहद के साथ लेने से लाभ होता है। 
3. रोजाना एक चम्मच शहद खाने से भी आंखों की रोशनी दुरूस्त रहती है। लेकिन ध्यान रहे कि शहद शुद्ध हो।
4. सुश्रुत संहिता के अनुसार रतौंधी यानी रात के अंधेपन के लिए अगस्त्य वृक्ष के फूल उपयोगी होते हैं। इन फूलों को पानी में भिगो दें कुछ देर बाद इन्हें मसलकर बंद आंखों पर रखें। 
5. आंखों को स्वस्थ रखने के लिए मुंह में ठंडा पानी भरकर तीन बार आंखों पर पानी के छींटे डालें। 
6. पांव के तलवों की रोजाना मालिश करने से भी आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए नारियल तेल या तिल का तेल फायदेमंद होता है।
7. तला हुआ भोजन आंखों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि दूध में पका हुआ अन्न आंखों के लिए लाभकारी होता है। ठंडी खीर में शहद मिलाकर सुबह-सुबह खाने से आंखों की रोशनी दुरूस्त रहती है।
8. आंखों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए देर रात भोजन करने से बचें और गरिष्ठ भोजन से भी परहेज करें।
9. भेषज रत्नावली ग्रंथ के अनुसार जौ का नियमित प्रयोग आंखों को ठीक रखता है। इसके लिए पांच किलो गेहूं के आटे में एक किलो जौ का प्रयोग किया जा सकता है। 
10. मूंग की दाल भी नेत्र ज्योति को स्वस्थ बनाए रखती है।
11. शुद्ध घी को लोहे के बर्तन में रखना चाहिए। इस घी के प्रयोग से आंखों की रोशनी बनी रहती है। पुराने लेकिन शुद्ध घी की दो-दो बूंदें नाक में डालने से भी लाभ होता है।

      नेत्र रोगों में कुदरती पदार्थों से ईलाज करना फ़ायदेमंद रहता है। कम उम्र में चश्मा लगना आजकल आम बात होती जा रही है|  लेकिन ऐसा नहीं है कि  किसी कारण से एक बार चश्मा लग गया तो  वह उतर नहीं सकता | ऐनक लगने  के प्रमुख कारण आँखों की भली प्रकार देख रेख नहीं करना,पोषक तत्वों की कमी, या आनुवांशिक हो सकता है| इनमें से  आनुवांशिक को छोडकर  अन्य कारण से लगा चश्मा  सही देख भाल ,व् खान पान का ध्यान रखने के आलावा देशी उपचार के द्वारा  उतारा जा सकता है|
 मोतियाबिंद बढती उम्र के साथ अपना तालमेल बिठा लेता है। अधिमंथ बहुत ही खतरनाक रोग है जो बहुधा आंख को नष्ट कर देता है। आंखों की कई बीमारियों में नीचे लिखे सरल उपाय करने हितकारी सिद्ध होंगे-
१) सौंफ़ नेत्रों के लिये हितकर है। मोतियाबिंद रोकने के लिये इसका पावडर बनालें। एक बडा चम्मच भर सुबह शाम पानी के साथ लेते रहें। नजर की कमजोरी वाले भी यह उपाय करें। 
२) विटामिन ए नेत्रों के लिये अत्यंत फ़ायदेमंद होता है। इसे भोजन के माध्यम से ग्रहण करना उत्तम रहता है। गाजर में भरपूर बेटा केरोटिन पाया जाता है जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। गाजर कच्ची खाएं और जिनके दांत न हों वे इसका रस पीयें। २०० मिलि.रस दिन में दो बार   लेना हितकर माना गया है। इससे आंखों की रोशनी भी बढेगी। मोतियाबिंद वालों को गाजर  का उपयोग  अनुकूल परिणाम  देता है।

३) आंखों की जलन,रक्तिमा और सूजन हो जाना नेत्र की अधिक प्रचलित व्याधि है। धनिया इसमें उपयोगी पाया गया है।सूखे धनिये के बीज १० ग्राम लेकर ३०० मिलि. पानी में उबालें। उतारकर ठंडा करें। फ़िर छानकर इससे आंखें धोएं। जलन,लाली,नेत्र शौथ में तुरंत असर मेहसूस होता है।
४) आंवला नेत्र की कई बीमारियों में लाभकारी माना गया है। ताजे आंवले का रस ५  मिलि. इतने ही शहद में मिलाकर रोज सुबह लेते रहने से आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है। मोतियाबिंद रोकने के तत्व भी इस  उपचार   में मौजूद हैं।
५) भारतीय परिवारों में खाटी भाजी की सब्जी का चलन है।इसका अंग्रेजी  नाम Indian red sorrel  है|  खाटी भाजी के पत्ते के रस की कुछ बूंदें आंख में सुबह शाम डालते रहने से कई नेत्र समस्याएं हल हो जाती हैं। मोतियाबिंद रोकने का भी यह एक बेहतरीन उपाय है।

६)  अनुसंधान में साबित हुआ है कि कद्दू के फ़ूल का रस  दिन में दो बार आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है। कम से कम दस मिनिट आंख में लगा रहने दें।
७) घरेलू चिकित्सा के जानकार विद्वानों का कहना है कि शहद  आंखों में दो बार लगाने से मोतियाबिंद नियंत्रित होता है।

८)   लहसुन की २-३ कुली रोज चबाकर  खाना आंखों के लिये  हितकर है।  यह हमारे नेत्रों के लेंस को स्वच्छ करती है।
९) पालक  का नियमित उपयोग करना मोतियाबिंद में लाभकारी पाया गया है। इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। पालक में पाया जाने वाला बेटा केरोटीन नेत्रों के लिये परम हितकारी  सिद्ध होता है।  ब्रिटीश मेडीकल रिसर्च में पालक का मोतियाबिंद नाशक  गुण प्रमाणित हो चुका है।
१०)   एक और सरल उपाय बताते हैं| अपनी  दोनों हथेलियां आपस में  रगडें  कि कुछ  गर्म हो जाएं|  फिर  आंखों पर ऐसे रखें कि ज्यादा दबाव मेहसूस न हो।  हां, हल्का सा दवाब लगावे। दिन में चार-पांच  बार और हर बार आधा मिनिट के लिये करें।  आंखों की रोशनी बढाने का नायाब तरीका है|

११)  किशमिश ,अंजीर और खारक पानी में रात को भिगो दें और सुबह खाएं । मोतियाबिंद  और ज्योति  बढाने की  अच्छी घरेलू दवा है।
१२)  भोजन के साथ सलाद ज्यादा मात्रा में शामिल करें । सलाद पर थोडा सा जेतून का तेल  भी  डालें। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने  के गुण   हैं  जो नेत्रों के लिये भी हितकर है।
१३)  पाठकों , अब मैं  वो उपचार बता रहा हूँ  जिससे कई लोगों  के चश्मे  उतर गए हैं|  नेत्र  ज्योति वर्धक इस उपचार की जितनी भी प्रशंसा  की जाय थोड़ी है|  इसमें तीन पदार्थ जरूरी हैं|  बड़ी सौंफ,मिश्री और बादाम |  तीनों बराबर मात्रा में १००-१०० ग्राम  लेकर महीन पीस लें |  कांच के बर्तन  में  भर कर  रखें|  रात को सोते वक्त दस ग्राम चूर्ण  एक गिलास  गरम दूध के साथ  लें|  यह प्रयोग ४०-५० दिन तक निरंतर करना है| 
१४) सूरज मुखी के बीजों का सेवन करना  आंखों के लिए सेहतमंद रहता है| इसमें विटामिन सी,विटामिन ई,बीता केरोटीन और एंटीआक्सीडेंटस होते है जो  आंखों  की  कमजोरी  दूर करते हैं| 

१५)  दूध व् अन्य डेयरी   उत्पाद  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करना नेत्र  विकारों में फायदेमंद  रहता है|  इन चीजों से आखों को उचित पोषण मिलता है|

१६) केवल बादाम का सेवन भी  आँखों  के लिए बहुत फायदेमंद  होता है|  रोजाना चलते फिरते  ८-१० बादाम  खाने से जरूरी मात्रा में विटामिन ई  प्राप्त होने से आँखें  स्वस्थ  रहती हैं|  बादाम में रेशा,वसा,विटामिन और मिनरल  पर्याप्त मात्रा में होते हैं| आयुर्वेद में उल्लेख है कि बादाम को भिगोकर खाने के बजाय अंकुरित करके  खाना ज्यादा  लाभप्रद होता है| अंकुरित करने के लिये बादाम १२ घंटे पानी में भिगोएँ | छानकर  बादाम सुखालें| कांच के जार में  रखें और अंकुरित होने के लिये ३- ४ दिन फ्रीज में रखें|

   रात को नो  बादाम भिगोएँ ,सुबह पीसकर पानी में घोलकर पी जाएँ|  इससे आँखे स्वस्थ रहती हैं| और निरंतर  उपयोग से आँखों का चश्मा  भी उतर जाएगा|

१७)  आँखों को स्वस्थ रखने के लिए  सोया मिल्क ,दही,मूंगफली,खुबानी का उचित मात्रा में सेवन करना लाभ दायक है|     

१८)  एक शौध के अनुसार  हरे पतेदार सब्जियों में केरोटिन नामक पिगमेंट  की ऐसी मात्रा मौजूद रहती है जिसमें आँखों की  रोशनी  तेज करने की क्षमता  होती है| विशेषज्ञों  के  अनुसार  यह  कुदरती केरोटीनाईड  आँख की पुतली पर सकारात्मक प्रभाव  डालता है और आँखों की रोशनी सुरक्षित रखने के अलावा  अनेक नेत्र रोगों से भी बचाव करता है|

 १९)  एक चने के दाने बराबर फिटकरी  को सेककर इसे १०० ग्राम गुलाब जल में डालें  और रोजाना सोते वक्त २-बूँदें आँख में डालने से  चश्मे का नंबर  कम हो जाता है|

२०)  बिल्व पत्र  का ३० मिली रस पीने और २-४ बूँद रस आँखों में  काजल की तरह लगाने से  रतौंधी  रोग में लाभ होता है|  अंगूर का रस भी आँखों के लिए वरदान तुल्य माना गया है| 

२१)  इलायची  आँखों के लिये बहुत लाभदायक होती है\ रात को सोने से पहले  २ इलायची पीसकर दूध में डालें| अच्छी तरह  उबालकर  फिर मामूली गरम  हालत में पी जायें|  इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है|

२२) अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते रहने से  नेत्र ज्योति  बढ़ती है|

२३)  हल्दी की  गांठ को तुवर की दाल में उबालकर  फिर छाया में सुखाकर रखलें|   इसे पानी में घिसकर सूर्यास्त से पूर्व  आँखों में काजल की तरह लगाएं | आँखे स्वस्थ रहती हैं और आँखों की लालिमा भी  दूर होती है|   

नेत्र-ज्योतिवर्द्धक व्यायाम और प्राकृतिक उपाय

आँखों का स्वास्थ्य असंयमित और अनियमित जीवनशैली के कारण बिगड़ता है। आँखों की बनावट सूक्ष्म तथा पूर्ण हैं। आँखें उसी समय तक ठीक काम कर सकती हैं जब तक कनीनिका, जलीय द्रव, ताल और  ताल के पीछे रहने वाले द्रव स्वच्छ रहते हैं। इनमें से किसी के भी अस्वच्छ होने पर दृष्टि में दोष उत्पन्न हो जाता है। दृष्टिपटल, मध्य पटल, दृष्टि नाड़ी तथा दृष्टि केन्द्रों के रोगों से भी दृष्टि खराब हो जाती है।
छोटे अक्षरों को पढ़ने, सीने-पिरोने,चित्रकारी करने, स्वर्णकारी करने, घड़ीसाजी करने आदि से आँखों  पर  दबाव पड़ता है। कम प्रकाश में पढ़ने या कोर्इ अन्य कार्य करने से भी आँखों को हानि पहुँचती है। अधिक  प्रकाश जैसे सूर्य या आग की ओर बहुत देर तक देखना भी हानिकारक है। झुककर या लेटकर पढ़ने से भी आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सामने से आता प्रकाश भी आँखों के लिए अच्छा नहीं होता है। पढ़ते या लिखते समय प्रकाश हमेशा बार्इ ओर से या पीछे से आना आँखों के लिए सर्वोत्तम होता है।
आँखों की भीतरी बनावट और व्यवस्था इस प्रकार से है कि पूरी आयु तक हमारी आँखें स्वस्थ रह सकती हैं, लेकिन आधुनिक जीवन में पर्यावरण, गलत खान-पान, विटामिन ‘ए’ की कमी, दूरदर्शन तथा फिल्म अधिक देखने से लोगों, विशेषकर बच्चों की आँखें खराब रहने, दृष्टि कमजोर हो जाने, जल्दी चश्मा लग जाने की शिकायत हो जाती है। थोड़ी-सी सावधानी से आँखों के रोगों से बचा जा सकता है और आँखों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
नींद कम लेने, लगातार नजला-जुकाम रहने, धुआं और धूल वाले स्थान पर रहने, आँखों की अच्छी तरह सफार्इ न करने आदि से भी आँखों की दृष्टि पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आँखों के कुछ ऐसे व्यायाम हैं जिनका प्रतिदिन अभ्यास करने से नेत्र ज्योति सदा ही बनी रहती है और नेत्रों का आकर्षण एंव स्वास्थ्य भी सही रहता है। दृष्टि के सभी प्रकार के रोगों का मूल कारण आँखों की बाहरी पेशियों पर तनाव पड़ना है, जो धीरे-धीरे आँखों का आकार ही बदल देता है। पास की दृष्टि में नेत्र गोलक की लम्बार्इ बढ़ जाती है, जिससे दूर के पदार्थों को देखने में असुविधा रहती हैं दूर की दृष्टि तथा वृद्धावस्था की अल्प दृष्टि में नेत्र-गोलक संकुचित अवस्था में रहते है, जिससे पास की वस्तु को देखना कठिन हो जाता है।
आँखों के व्यायाम नेत्र संबंधी दोषो से मुक्ति पाने में व्यक्ति की पूरी मदद करते हैं। यहां कुछ नेत्र व्यायाम दिए जा रहे हैं, जिनके अभ्यास से आप नेत्र समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।
करतल विश्राम :
आँखे ढीली बंद करें। दोनों हाथों की हथेलियां प्याली की तरह बनाकर गाल की हड्डियों पर रखते हुए उनसे अपनी बंद आँखों को इस प्रकार ढकें कि हथेलियां आँखों को न छुएं। हथेलियों से आँखे ढकते समय ध्यान रखें कि न तो  आँखों पर कोर्इ दबाव ही पड़े और न ही कहीं से प्रकाश आ सके। हाथ और आँखें तनाव रहित रखें। मस्तिष्क को तनावमुक्त रखने के लिए बिल्कुल कालापन का अनुभव करें। सही रीति के करतल-विश्राम में कालापन देखने के लिए कोर्इ प्रयास न करें बल्कि बिना किसी प्रयास के सहज ही बिल्कुल कालापन का अनुभव होना चाहिए क्योंकि तभी आँखें और मस्तिष्क विश्राम की अवस्था में हो सकते हैं।
कुछ समय तक इसी अवस्था में रहने के बाद आप हाथ हटाकर तेजी से आँखें मिचकाइए और आँखें खोलिए। अब आप देखेंगे कि आपकी आँखें अधिक ताजगीपूर्ण और शक्तिशाली हो गर्इ है।
करतल-विश्राम का अभ्यास दिन में चार-पाँच बार, दो से दस मिनट तक कर सकते हैं। आँखों पर अनावश्यक दबाव से उत्पन्न रोगों तथा मोतियाबिंद की शांति के लिए करतल-विश्राम बहुत लाभदायक है और इसे प्रतिघंटे कुछ मिनट तक अवश्य करना चाहिए।
करतल-विश्राम में काले रंग का ध्यान के साथ-2 मस्तिष्क को आरामदेह स्थिति में रखना भी आवश्यक है। सोचना बिल्कुल बंद कर दें। यदि ऐसा न कर सकें तो कम से कम मस्तिष्क को अशांत करने वाले विचार जैसे खराब स्वास्थ्य, मन की सुस्ती, चिंता, क्रोध, आदि से मुक्त रखें और इनके स्थान पर अच्छे स्वास्थ्य एवं सुखद विचार में महत्व दें।
पुतली घुमाने की क्रियाएं :
आँखों की मांसपेशियों और आँखों से संबंधित स्नायु को ताकतवर व तनाव रहित बनाने के लिए करतल-विश्राम के अलावा इन व्यायामों को भी करना चाहिए।
पुतलियों को उपर-नीचे घुमाएं। इसके लिए रीढ़ सीधी और गर्दन को स्थिर रखकर बिना सिर घुमाएं दोनों पुतलियों को उपर - नीचे घुमाए अथार्त दोनों पुतलियों को पहले उपर की ओर ले जाते हुए आकाश देखें और फिर नीचे लाते हुए धरती देखें। इस तरह सहजता से क्रमष: उपर नीचे छ: बार देखें।
पुतलियों को बाएं-दाएं घुमाएं, मानों पुतलियां क्रमश: बाएं-दाएं कान को देख रही हों। सहजता से ऐसा छ: बार करे।
पुतलियों को चक्राकार घुमाएं अर्थात पहले बाएं से दाऐ बड़ा से बड़ा गोला बनाते हुए गोलकार घुमाएं और फिर दाएं से बाएं घुमाएं। ऐसा चार बार सहजता से करें।
इस प्रकार ( उपर-नीचे, बाएं-दाएं और गोलाकार घुमाने की ) तीनों क्रियाएं पहले धीरे-धीरे और बाद में जल्दी-जल्दी करें। प्रत्येक क्रिया चार-छ: बार करने के बाद कोमलता से पलक झपकाकर आँखें बंद करके कुछ क्षण विश्राम कर लें।
इन्हें दो-तीन बार, बीच-बीच में विश्राम देकर दोहराया जा सकता है। पुतली घुमाने से नेत्र-पेशियों का तनाव हटकर बहुत आराम मिलता है और दृष्टि शक्ति बढ़ती है।


दृष्टि को बार-2 बदलने का अभ्यास करना चाहिए। दृष्टि को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर ले जाने या एक बिंदु को देखकर दूसरे बिंदु पर दृष्टि ले जाने को ‘दृष्टि - ध्यान’ कहते हैं। अंगुठे के पास वाली तर्जनी उंगली अपनी आँखों के सामने 10 इंच की दूरी पर रखें। अब उंगली के उपरी सिरे पर दृष्टि जमाएं और उसे साफ-2 देखें। फिर उंगली को सीध में 20 फीट दूर कोर्इ बड़ी वस्तु जैसे खिड़की को देखें। दृष्टि को पास और दूर केंद्रित करें अर्थात बारी-बारी से दूर-पास देखें। यह क्रिया दस बार करने के बाद एक क्षण के लिए पलक झपकाकर विश्राम करें तथा दोहराएं। यह दृष्टि अनुसरण( Accommodation ) सुधारने के लिए विषेश गुणकारी है। स्वस्थ दृष्टि किसी एक बिंदु पर अधिक देर तक स्थिर नहीं रहती है बल्कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलती रहती है।
पलक झपकाएं। पलक झपकाना अर्थात् पलकों को जल्दी-जल्दी बंद करने और खोलने की क्रिया से आँखों को आराम मिलता है, जिससे नजर तेज होती है। पलकें न झपका सकने का अर्थ है आँखों में तनाव और गड़बड़ी। इसलिए एकटक देखने की आदत पड़ने पर दिन में कर्इ बार पलकें झपकाने का अभ्यास करना शुरू करना चाहिए। जैसे एक बार में लगातार दस बाद पलक झपकना। पढ़ते समय भी प्रत्येक दस सेंकड़ में एक या दो बार पलक झपकनी चाहिए। पलक झपकने से आँखों की थकान मिटती है, आँख की पेशियां सिकुड़ने और फैलने से रक्त संचार सुधरता है। और अश्रु ग्रंथि से पर्याप्त तरल निकलते रहने से आँख साफ गीली और चमकदार रहती है।
हंसने और मुस्कराने का आँखों पर हितकारी प्रभाव पड़ता है और आँखों में एक मुग्ध कर देने वाली चमक आ जाती है। हंसने से दिल हल्का होता है, तनाव घटता है, और मानसिक तनावजन्य रोग जैसे थकान, चिंता, विषाद, चिड़चिड़ापन आदि मिटते हैं। प्रतिदिन चार-पांच किलोमीटर दौड़ने से जो व्यायाम होता है और उससे जो शारीरिक क्षमता बढ़ती है, उतनी ही पांच मिनट हंसने से बढ़ती है। कम से कम दिन में तीन बार खिलखिलाकर हंसना चाहिए। उन्मुक्त हंसी से मस्तिष्क से लेकर संपूर्ण नाड़ी-मंडल स्पंदित हो उठता है और फेफड़ों की अशुद्ध वायु शरीर से बाहर निकल जाती है। हंसने से न केवल मानसिक तनाव घटता है बल्कि रक्त संचालन और पाचन भी सुधरता है।
आँखों के लिए योगासन :
आँखों के सौंदर्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए अर्द्धमत्स्येंद्रासन उष्ट्रासन, धनुरासन, हस्तपादोत्तानासन, हलासन, सर्वांगासन, शीर्षासन आदि का नियमित अभ्यास होना चाहिए। इनमें से उष्ट्रासन की विधि यहाँ प्रस्तुत है-
उष्ट्रासन :
वज्रासन में बैठिए। अब एड़ियों को खड़ा करके उन पर दोनों हाथों को रखें। हाथों को इस प्रकार रखें कि अंगुलियाँ अंदर की तरफ अंगुश्ठ बाहर को हों।
श्वास अंदर भरकर सिर एवं ग्रीवा को पीछे मोड़ते हुए कमर को उपर उठाएं। शवास छोड़़ते हुए एड़ियों पर बैठ जाएं। इस प्रकार तीन-चार आवर्त्ति करें।
योगासनों से साथ-साथ प्रतिदिन सूत्र तथा जलनेति का भी अभ्यास करें। सप्ताह में तीन बार कुंजल करें। खुली हवा में सैर करे।

प्राकृतिक प्रयोग

आँखों को प्रतिदिन ताजा शीतल पानी या त्रिफला के पानी से धोएं।
पढ़ते समय या टी वी देखते समय आँखों को झपकाते रहें।
कान में तेल, नाक में शुद्ध घी और आँख में मधु डालने से आँखे स्वस्थ रहती है।
आँखों के चारों ओर हाथों की उंगलियों से अच्छी तरह मालिश इस प्रकार करें कि आँखों पर दबाव न पड़े। इसके बाद ठंड़े पानी से आँखों को धोएं या ठंडे पानी की पट्टी रखें। ऐसा दिन में दो-तीन बार करे।  
अपने भोजन में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘ए’ युक्त आहार का प्रयोग करें। हल्का तथा सुपाच्य भोजन करें। रोगी का 50 प्रतिशत भोजन कच्चा फल, सब्जी, रस, सलाद आदि  और 50 प्रतिशत पका सुपाच्य भोजन होना चाहिए।
नेत्र-ज्योति बढ़ाने और चश्मा छुड़ाने के लिए-बदाम-गिरी, सौंफ (बड़ी), मिश्री कूंजा-तीनों को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें और किसी कांच के बर्तन में रख दें। प्रतिदिन रात में सोते समय 10 ग्राम की मात्रा 250 ग्राम दूध के साथ चालीस दिन तक निंरतर लें। इससे दृष्टि इतनी तेज हो जाती है कि चश्मे की जरूरत ही नहीं रहती है। इसके अतिरिक्त इससे दिमागी कमजोरी, दिमाग की गर्मी, दिमागी तनाव और बातों को भूल जाने की बीमारी भी दूर हो जाती है।
बच्चों को उपरोक्त नुस्खा आधी मात्रा में दें। पूर्ण लाभ के लिए औषधि के सेवन के दो घंटे तक पानी न पीएं। नेत्र ज्योति के साथ-साथ याद्दाश्त भी बढ़ती है। कूंजा मिश्री न मिले तो साधारण मिश्री का प्रयोग करे।
सुबह उठते मुँह में पानी भरकर मुँह फुलाकर ठड़े जल से आँखों पर छींटे मारें। ऐसा दिन में तीन बार करें।
आंवला, हरड़, बहेड़ा ( गुठली रहित ) समान मात्रा में लेकर उन्हें कूटकर चूर्ण बना लें। प्रतिदिन शाम को इसमें से 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को कोरे मिट्टी या शीशे के बर्तन में एक गिलास पानी डालकर भिगो दें। सुबह इसको मसलकर छान लें। फिर इसके निथरे हुए पानी से हल्के हाथ से नेत्रों को खूब छींटे लगाकर धो लिया करें। इससे आँखों की ज्योति की रक्षा होती है और नजर तेज होती है। आँखों की अनेक बीमारियाँ भी ठीक हो जाती हैं। इस त्रिफला जल से निंरतर महीने दो महीने से कम नजर आना, आँखों के आगे अधेंरा छा जाना, सिर घूमना, आँखों में उष्णता, रोहें, खुजली, दर्द, लाली, जाला, मोतियाबिंद आदि सब नेत्र रोगों  का नाश होता है।
नेत्र रोगी उपचार के दौरान मैदा, चीनी, धुले हुए चावल, खीर, उबले हुए आलू, हलवा भारी तथा चिकनार्इ वाले भोजन, चाय, काफी शराब, अचार, मुरब्बे, टॉफियों, चॉकलेट आदि का सेवन न करें।
कद्दूकस किया हुआ आंवला या आंवला का मुरब्बा, पपीता, पका आम, दूध, घी, मक्खन, मधु, काली मिर्च, घी-बूरा, सौंफ-मिश्री, गुड़, सूखा धनिया, चौलार्इ, पालक, पत्तागोभी, मेथी पत्ती, कढ़ी पत्ती आदि कैरोटीन प्रधान प​त्तियों वाली वनस्पतियां, पालक या कढ़ी पत्ती युक्त दाल, अंकुरित मूंग, गाजर, बादाम, मधु आदि का सेवन आँखों के लिए हितकारी है।
इलायची के दानों का चूर्ण और शक्कर समभाग में लेकर उसमें एंरड का तेल मिलाकर चार ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह खाने से 40 दिनों में ही नजर की कमजोरी दूर हो जाती है। इससे आँखों में ठंड़क आती है और नेत्र ज्योति बढ़ती है।
हरा धनिया पीसकर उसका रस निकालकर दो-दो बूंद आँखों में प्रतिदिन डालने से भी आँखों की ज्योति में वृद्धि हो जाती है।

Chashma Hataane ke Ghrelu Aayurvedic Upay

आँखों की रोशनी बढ़ाने के आसान तरीके ( Simple Ways for Good Eye Vision ) :
बादाम और सौंफ ( Almond and Fennel ) : बादाम और सौंफ दोनों ही आँखों की रोशनी बढाने के लिए लाभदायी माने जाते है, साथ ही ये दोनों ही ऐसी सामग्री या पदार्थ है जो लगभग हर घर में उपलब्ध भी होता है. इसीलिए इस उपाय को सबसे अधिक अपनाया भी जाता है.

उपाय ( Remedy ) : इसके उपाय को अपनाने के लिए आप समान मात्रा में मिश्री, बादाम और सौंफ लें और उन्हें अच्छी तरह पीसकर उसका पाउडर बना लें. इससे पाउडर को लगभग 1 महीने तक डिब्बे में पडा रहने दें. उसके बाद आप रोजाना रात को सोते हुए इस पाउडर को 10 ग्राम की मात्रा में लें और 250 ग्राम पानी के साथ सेवन करें. इस उपाय को नियमित रूप से 40 तक अपनाने से ना सिर्फ आपकी आँखों की रोशनी तेज होती है बाकि आपकी यादाश्त और दिमाग भी मजबूत और तेज होता है.

त्रिफला ( Triphala ) : त्रिफला में मौजूद चमत्कारिक तत्वों के कारण आयुर्वेद में इसका एक अहम स्थान है. त्रिफला तीन फलों ( आंवला, हरड और बहेड़ा ) से मिलकर बना है और इसीलिए इसे त्रिफला कहा जाता है. ये लगभग हर बिमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इनमे ऐसे कुछ तत्व भी मौजूद होते है जो चश्मा हटाने में भी सहायक होते है. CLICK HERE TO KNOW आँखों की देखभाल कैसे करें ... 
चश्मा हटाने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय 
चश्मा हटाने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय
उपाय ( Remedy ) : आप त्रिफला लें और उसे सुखाकर पीस लें. प्राप्त चूर्ण से आप 1 चम्मच लें और उसे 1 ग्लास पानी में डाल कर रात भर रख कर सो जाएँ. अगले दिन प्रातःकाल के समय आप पानी को छानकर उसे अपनी आँखों को धोयें. इस उपाय को आप 1 महीने तक अपनाएँ. आपको समय के साथ साथ अपनी आंखों में फर्क खुद महसूस होने लगेगा. ये आँखों के इलाज का एक रामबाण इलाज माना जाता है.

एक प्रयोग ( An Experiment ) : निम्नलिखित प्रयोग के इस्तेमाल से शत प्रतिशत आँखों की रोशनी, स्वस्थ बलवान शरीर और बुद्धिमता प्राप्ति के परिणाम मिले है. इसलिए इस उपाय को नेत्र ज्योति बढाने का सबसे अधिक सफल तरीका माना जाता है. साथ ही इस उपाय को वो व्यक्ति भी अपना सकता है जिनकी आँखें ठीक है.

उपाय ( Remedy ) : आप एक कुल्हड़ लें और उसमे एक ग्लास पानी डालें. इसके बाद आप पानी में 5 ग्राम बादाम, 10 ग्राम खसखस, 5 ग्राम मगजकरी, 5 से 6 काली मिर्च, 4 ग्राम मालकंगनी और 5 ग्राम गोरखमुंडी डालें. और इसे रात भर भीगने के लिए छोड़ दें.
सुबह उठने पर आप पानी को अलग कर बाकी के मिश्रण को अच्छी तरह से पीस लें और इसे देशी घी में डालकर लाल होने तक भुनें. अब आप इसमें 400 मिलीलीटर दूध गर्म करें और इस मिश्रण को डालें. आप स्वादानुसार मिश्री भी डाल सकते हो और इसके बाद आप इसका सेवन करें. इस उपाय को आप 15 दिनों तक अपनाएँ. इसके चमत्कारिक लाभ आपके सामने होंगे.

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मिश्रण में मिलाया हर तत्व अपना महत्व रखता है और उसी अनुसार लाभ पहुंचाता है जैसेकि बादाम, खसखस और मगजकरी से बुद्धि तेज होती है, तो मालकंगनी से शरीर स्वस्थ और बलवान होता है. ये यादाश्त बढाने में भी सहायक होता है. ये सब मिलकर आँखों के लिए लाभकारी सिद्ध होते है. इस तरह से ये प्रयोग पूर्ण शरीर के लिए लाभकारी सिद्ध होता है.

आंवला ( Amla ) : जहाँ आयुर्वेद की और शरीर को स्वस्थ बनाने की बात हो और वहाँ आंवले का नाम ना आयें, ऐसा कभी भी नही हो सकता. बिना आंवले के आयुर्वेद का कोई महत्व नही क्योकि ये वो चीज है जो खुद तो गुणकारी है ही साथ ही जिसके साथ इसे मिलाया जाता है ये उसके गुणों में भी वृद्धि कर देता है. इसका लाभ उठाने के लिए आप इसे किस भी तरह से ( जैम, मुरब्बा, दवाई, जूस, हलवा, आचार, कच्चा खायें, लेप, पाउडर इत्यादि ) इस्तेमाल कर सकते है.  

उपाय ( Remedy ) : आँखों की रोशनी में वृद्धि करने के लिए आप आंवले का जूस निकाल लें और इसमें कुछ मात्रा में शहद मिलाएं. आप जूस का रोजाना सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करें. इसके अलावा आप एक अन्य उपाय भी अपना सकते हो जिसके लिए आप आंवलों को सुखा लें और उन्हें पीसकर उसका पाउडर बना लें. प्राप्त पाउडर को आप 1 चम्मच की मात्रा में रोजाना रात को सोने से पहले दूध या पानी के साथ लें. निश्चित रूप से आपकी आँखों में आराम मिलेगा.

मुलेठी ( Liquorice ) : एक अन्य उपाय के अनुसार आप कुछ मुलेठी लेकर उसका पाउडर तैयार करें. आप 1 चम्मच पाउडर में समान मात्रा में शहद और ½ चम्मच देशी घी मिलाएं. इसके बाद आप इस मिश्रण को एक ग्लास गरमागर्म दूध में डालें और 3 महीनों तक इसका नियमित रूप से सेवन करें. धीरे धीरे आपकी आँखों की रोशनी में इजाफा होने लगेगा.

नुसखे : नेत्र रोग

• यदि आँखों में जलन व लालिमा रहती हो तो ग्वार पाठे का ठण्डा गूदा आँखों पर बांधें। इससे लाभ होता है।
• त्रिफला चूर्ण को शहद में मिलाकर रात को सोते समय सेवन करने से आँखों की बहुत-सी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।
• आँवलेेेे को कूट कर दो घण्टे तक पानी में उबालने के बाद छानकर ठंडा करके दिन में तीन बार इस जल की बूंदें आँखों में डालें। इससे नेत्र रोग से राहत महसूस होती है।
• बेल की पत्तियों का रस निकाल कर बारीक कपड़े से छान लें। एक-दो बूँदें आँख में डालने से आँख का दर्द करना, आँख आना तथा आंखों से धुंधलापन की शिकायत दूर हो जाती है। आँखों की चुभन, पीड़ा, शूल आदि से भी राहत महसूस होती है।
• आंखों के इलाज में लौकी का छिलका बहुत उपयोगी है। लौकी का छिलका साये में सुखाने के बाद इसे जला लें। इसे खरल में पीस कर बहुत बारीक कर लें। सुबह तीन-तीन सलाई दोनों आँखों में सुरमे की तरह लगाने से कुछ दिनों के बाद आंख संबंधी सारे विकार दूर हो जाते हैं।
• इमली के बीजों की गिरी पत्थर पर घिस कर लेप-सा बनाकर गुहेरी पर लगाने से ठण्डक मिलती है। इससे गुहेरी ठीक भी हो जाती है।

नेत्र रोग – कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार व घरेलू उपचार?

कारण

आंखों में विभिन्न प्रकार के रोग जैसे धूप में चलना, ठंडी हवा का प्रभाव, नींद न आना, समय पर न सोना, रात में जागना, उल्टी को रोक लेना, आंखों में धुल पड़ जाना, आंखों में धूल और धुआं लगना, सिर तथा आंखों में चोट लगना, अधिक देर तक पढ़ना या आंखें गड़ाकर लिखना, धूप में चलने के बाद ठंडे पानी से स्नान कर लेना आदि कारणों से तरह-तरह के आँखों के रोग हो जाते हैं ।

लक्षण

आंखें कीचड़ फेंकने लगती हैं और लाल पड़ जाती हैं । कई खार सूजन भी आ जाती है । आँखों में कांटे की तरह खड़कन होती है । बार-बार पानी
आता है । दर्द भी होता है । कभी-कभी आंखों के कारण सिर में भी दर्द हो जाता है ।

उपचार

प्याज के रस में उसकी दोगुनी मात्रा में शहद मिलाएं । रोज आँखों में डालें । यदि आंखों में ज्यादा लगे, तो उतनी ही मात्रा में गुलाब जल डाल दें ।
नीम के पत्तों को उबालें, उसमें थोङी-सी फिटकिरी डालें और आँखों को अच्छी तरह धोएं । काफी लाभ होता है ।
नीम के पत्तों का अर्क तथा मुण्डी का अर्क मिलाकर आंखों में डालने, से लाली छंट जाती है ।
नीम के पत्ते और मकोय का रस मिलाकर आँखों की पलकों पर लगाने से लाली छंट जाती है और पानी निकलना भी बंद को जाता है ।
बबूल तथा नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर शहद के साथ आँखों में लगाएं ।
रसौत को पानी में घिसकर आंखों को पलकों पर लगाएं ।
लहसुन की चार कलियां पानी में भिगो दें । सुबह जलपान से पूर्व इन कलियों को खाकर ऊपर से वह पानी भी पी लें । इसके सेवन से मोतियाबिन्द भी नष्ट हो जाता है ।

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