मिर्गी: सच को जानें,
मिर्गी के दौरे दिमाग की प्रवृत्तियों में अचानक होने वाले अनियंत्रित परिवर्तन हैं। ये इस बात के प्रतीक हैं कि दिमाग में कोई समस्या मौजूद है। अधिकतर दौरे कुछ मिनट से कम समय तक ही रहते हैं और दौरे के बाद व्यक्ति चकराया हुआ हो सकता है। जिस व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हों उसे एपीलैप्सी नामक रोग हो सकता है।
दौरों के लक्षण
कई बार दौरा पड़ने से पहले कुछ लोगों को चेतावनी स्वरूप लक्षण महसूस होते हैं जिसे औरा कहा जाता है। यह सिरदर्द, दृष्टि में परिवर्तन या आवाजों का सुनाई देना या धुएं की तरह की कोई गंध आना हो सकता है।
दौरा पड़ने के दौरान
शरीर जकड जाना, झटके आना या चेहरे की मांसपेशियों के खिंच जाने जैसी नियंत्रित न की जा सकने वाली शारीरिक गतिविधियां।
एक ही जगह पर टकटकी लगाए देखते रहने का दौरा पड़ना।
सांस लेने में तकलीफ, लार टपकाना।
मलाशय या मूत्राशय पर नियंत्रण खो देना।
चेतना का लोप, स्मृति लोप या संभ्रान्ति।
देखने वालों को क्या करना चाहिए
सांस लेने में तकलीफ, लार टपकाना।
मलाशय या मूत्राशय पर नियंत्रण खो देना।
चेतना का लोप, स्मृति लोप या संभ्रान्ति।
देखने वालों को क्या करना चाहिए
शांत बने रहें। दौरे का क्रम पूरा हो लेने दें।
रोगी अपने को चोट न पहुंचाए, ध्यान रखें।
रोगी ऊंचाई पर है तो उसे गिरने से बचाएं।
कसे कपड़ों, बेल्ट, टाई को ढीला कर दें।
रोगी के सिर को सहारा दें।
दौरा पूरा हो जाने के बाद रोगी को एक तरफ पलट दें कि उसका दम न घुटने पाए।
मुंह से निकले झाग को साफ कर दें।
मिर्गी को अभी भी बहुत गलत समझा जाता है, कुछ लोग अभी भी इसके उपचार के लिए बाबाओं की सहायता लेते हैं जबकिउन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
रोगी अपने को चोट न पहुंचाए, ध्यान रखें।
रोगी ऊंचाई पर है तो उसे गिरने से बचाएं।
कसे कपड़ों, बेल्ट, टाई को ढीला कर दें।
रोगी के सिर को सहारा दें।
दौरा पूरा हो जाने के बाद रोगी को एक तरफ पलट दें कि उसका दम न घुटने पाए।
मुंह से निकले झाग को साफ कर दें।
मिर्गी को अभी भी बहुत गलत समझा जाता है, कुछ लोग अभी भी इसके उपचार के लिए बाबाओं की सहायता लेते हैं जबकिउन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
कुछ मिथक और तथ्य
मिथक : मरीज मानसिक रूप से विक्षिप्त है।
तथ्य : मिर्गी तंत्रिका कोशिकाओं के कुछ समय असामान्य प्रक्रियाओं का होने वाला विकार है। अन्यथा व्यक्ति मानसिक रूप से पूर्णत: सामान्य होता है।
मिथक : सभी मिर्गी में झटके आते हैं।
तथ्य- यह आवश्यक नहीं है। कुछ प्रकार की मिर्गी में मरीज टकटकी लगाकर देखता रहता है।
मिथक : मिर्गी आनुवंशिक बीमारी है।
तथ्य- यह हमेशा सत्य नहीं होता। दिमागी बुखार, ब्रेन ट्यूमर, सिर की चोट, शराब की लत भी इसका कारण हो सकती है।
मिथक : मिर्गी दूसरों पर निर्भरता बढ़ाती है।
तथ्य- मिर्गी के लोग उचित व्यवहार व सावधानियों के साथ एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
मिथक : मिर्गी दौरे के समय मरीज को कसकर पकड लेना चाहिए।
तथ्य- दौरे के समय ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, मरीज को करवट दिलवाकर आसपास की सभी वस्तुएं हटा देना चाहिए।
मिथक : मिर्गी का मरीज शादी नहीं कर सकता है।
तथ्य- यह गलत धारणा है। उचित उपचार के साथ मरीज सामान्य जीवन यापन कर सकता है।
मिथक : मिर्गी से पीड़ित महिला गर्भवती नहीं हो सकती।
तथ्य- मिर्गी या इसकी दवाएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करती और वह बच्चों को जन्म दे सकती है।
क्या नहीं करें
घबराएं नहीं।
शरीर के अंगों को पकड़ने से रोकने की कोशिश न करें।
रोगी के इर्दगिर्द भीड़ जमा न होने दें।
दौरे के समय रोगी के मुंह में कोई चीज नहीं डालें।
जब तक व्यक्ति (दौरे के समय) किसी खतरे में न हो, उसे इधर-उधर करने की कोशिश न करें।
दौरे से पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले व्यक्ति को कोई भी चीज खाने या पीने के लिए नहीं दें।
औषधि की खुराक कम नहीं करें।
गोलियां लेना बंद नहीं करें।
घबराएं नहीं।
शरीर के अंगों को पकड़ने से रोकने की कोशिश न करें।
रोगी के इर्दगिर्द भीड़ जमा न होने दें।
दौरे के समय रोगी के मुंह में कोई चीज नहीं डालें।
जब तक व्यक्ति (दौरे के समय) किसी खतरे में न हो, उसे इधर-उधर करने की कोशिश न करें।
दौरे से पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले व्यक्ति को कोई भी चीज खाने या पीने के लिए नहीं दें।
औषधि की खुराक कम नहीं करें।
गोलियां लेना बंद नहीं करें।
रोगी क्या करें
आपका उपचार आपको किस तरह प्रभावित करता है, इसका रिकॉर्ड रखें।
उन चीजों के प्रति सावधान रहें जो आपके दौरे को अभिप्रेरित करती हैं।
यदि आपको दौरे के प्रकार में या अपने रूप-रंग या मिजाज में कोई बदलाव नजर आता है तो अपने चिकित्सक से मिलें।
अपनी निर्धारित औषधियों को समय रहते प्राप्त कर लें। कभी भी दवाएं बीच में समाप्त न होने दें।
अपने चिकित्सक के साथ दवा के साइड इफेक्ट्स पर चर्चा करें।
पूरी नींद लें व कोशिश करें कि काम का बोझ अधिक न हो तथा तनाव न हो।
मिर्गी का उपचार
उपचार दौरों के कारण पर आधारित होता है।
उन चीजों के प्रति सावधान रहें जो आपके दौरे को अभिप्रेरित करती हैं।
यदि आपको दौरे के प्रकार में या अपने रूप-रंग या मिजाज में कोई बदलाव नजर आता है तो अपने चिकित्सक से मिलें।
अपनी निर्धारित औषधियों को समय रहते प्राप्त कर लें। कभी भी दवाएं बीच में समाप्त न होने दें।
अपने चिकित्सक के साथ दवा के साइड इफेक्ट्स पर चर्चा करें।
पूरी नींद लें व कोशिश करें कि काम का बोझ अधिक न हो तथा तनाव न हो।
मिर्गी का उपचार
उपचार दौरों के कारण पर आधारित होता है।
यदि व्यक्ति को दौरा पहली बार पड़ा है तो चिकित्सक लक्षणों के बारे में पूछेगा और यह देखने के लिए जांच करेगा कि किसी चिकित्सीय बीमारी की वजह से तो यह नहीं हुआ है। रक्त जांच और कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), इलेक्ट्राएंसीफेलाग्राम (ईईजी) या लंबर पंक्चर जैसी अन्य जांचें की जा सकती हैं।
ऐपीलैप्सी से पीड़ित व्यक्ति में, दौरा पड़ना इस बात का संकेत होता है कि उस व्यक्ति की दवा में बदलाव की जरूरत है। अगर दवाओं से व्यक्ति के दौरों में कमी नहीं आती, तो शल्यक्रिया इसका एक विकल्प हो सकता है।
ऐपीलैप्सी से पीड़ित व्यक्ति में, दौरा पड़ना इस बात का संकेत होता है कि उस व्यक्ति की दवा में बदलाव की जरूरत है। अगर दवाओं से व्यक्ति के दौरों में कमी नहीं आती, तो शल्यक्रिया इसका एक विकल्प हो सकता है।
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