वास्तुशास्त्र के ये उपाय तो आपको व्यापार में कभी भी हानि नहीं होगी!
आज के समय में सभी को रुपये-पैसे की जरुरत पड़ती है, बिना इसके जीवन का गुज़ारा कर पाना असंभव है। कुछ लोग पैसे कमाने के लिए नौकरी करते हैं, कुछ छोटी- मोटी मजदूरी करते हैं और कुछ लोग अपना खुद का व्यवसाय करते हैं। लेकिन व्यवसाय करने वालों को लाभ ही होगा यह कहना थोड़ा मुश्किल होता है। कई बार विपरीत परिस्थियाँ होने की वजह से व्यापार में बहुत नुकसान हो जाता है।
औद्योगिक भूखण्ड वास्तुशास्त्र का ज्ञान दिलाएगा आपको धनलाभ:
औद्योगिक भूखण्ड वास्तुशास्त्र एक ऐसी ही विद्या है, जिसके अंतर्गत प्रकृति में उपलब्ध सभी शक्तियों को समायोजित करके उनके भरपूर दोहन कैसे किया जाए, इसकी जानकारी दी जाती है। अगर आप अपने व्यापार या दुकान को शुरू करने के लिए कोई जमीन-जायदाद खरीद रहे हैं, तो पहले निम्न बातों को देख लें, इससे आने वाले समय में आपको बहुत फायदा होगा। आपकी दुकान खूब चलेगी और व्यापार में आपको बहुत तरक्की होगी।
भूमि खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान:
*- आप जो भूमि खरीदने जा रहे हैं, अगर वह आयताकार या वर्गाकार हो तो बहुत अच्छा है।
*- भूमि पंचकोणीय, षटकोणीय, बीच में से कटी हुई या बेलनाकार नहीं होनी चाहिए, वास्तु की दृष्टि से यह शुभ नहीं माना जाता है।
*- आप जो भूमि खरीद रहे हैं, अगर उसमे हड्डी, लकड़ी, दीमक, मेंढक या भष्म मिले तो वह भूमी कभी भी ना खरीदें।
*- आप जो जमीन खरीद रहे हों, वह बंजर, कटी-फटी या दरार वाली नहीं होनी चाहिए, बल्कि भूमि ऊपजाऊ होनी चाहिए।
*- जमीन के बीच में कोई गड्ढा नहीं होना चाहिए एवं दक्षिण-पक्षिम की तरफ भूमि ढलान वाली भी नहीं होनी चाहिए।
*- भूमि पंचकोणीय, षटकोणीय, बीच में से कटी हुई या बेलनाकार नहीं होनी चाहिए, वास्तु की दृष्टि से यह शुभ नहीं माना जाता है।
*- आप जो भूमि खरीद रहे हैं, अगर उसमे हड्डी, लकड़ी, दीमक, मेंढक या भष्म मिले तो वह भूमी कभी भी ना खरीदें।
*- आप जो जमीन खरीद रहे हों, वह बंजर, कटी-फटी या दरार वाली नहीं होनी चाहिए, बल्कि भूमि ऊपजाऊ होनी चाहिए।
*- जमीन के बीच में कोई गड्ढा नहीं होना चाहिए एवं दक्षिण-पक्षिम की तरफ भूमि ढलान वाली भी नहीं होनी चाहिए।
भूमि का ईशान कोण में ज्यादा होना अच्छा होता है:
जब भी आप भूमि लें तो ज्यादा बेहतर होता है कि आप चौकोर भूमि लें, वास्तु में ऐसी ही जमीन को अच्छा माना जाता है। अगर भूमि ईशान कोण में ज्यादा हो तो और अच्छा है, ऐसी स्थिति में भूमि किसी भी आकार की हो कोई फर्क नहीं पड़ता है। अगर भूमि का कोना अग्नि कोण में ज्यादा है, तो यह अशुभ माना जाता है। नैत्रित्य कोण में अगर कोई भूमि बढ़ी हुई है तो इससे दुर्घटना यह धन-हानि हो सकती है। अगर आपकी भूमि वायव्य कोण में बढ़ी हुई है तो इससे घर में मानसिक समस्याएँ, शत्रुता, राज-भय और भयानक अशांति का खतरा बना रहता है।
अग्नि कोण में पूर्व की तरफ जमीन का कटा होना अशुभ होता है:
अगर आपकी जमीन में अग्नि कोण में पूर्व की तरफ कटी हुई हो तो यह धन या मानहानि का कारण बनता है। जमीन नैत्रित्य कोण से कटी हुई होगी तो, इससे मानसिक अशांति होती है। जमीन में वायव्य कोण में उत्तर दिशा की ओर कटौती सही मानी जाती है, लेकिन अगर पक्षिमी दीवार की तरफ कटी हुई हो तो यह अशुभ परिणाम देती है।
अगर आपकी जमीन में अग्नि कोण में पूर्व की तरफ कटी हुई हो तो यह धन या मानहानि का कारण बनता है। जमीन नैत्रित्य कोण से कटी हुई होगी तो, इससे मानसिक अशांति होती है। जमीन में वायव्य कोण में उत्तर दिशा की ओर कटौती सही मानी जाती है, लेकिन अगर पक्षिमी दीवार की तरफ कटी हुई हो तो यह अशुभ परिणाम देती है।
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